ॐ साईं
हर मंझर-ए-झील गेहेरा नहीं होता,
हर फुल-ए-चिलमन सेहेरा नहीं होता;
हर चमक-ए-गहेना जेवर नहीं होता,
हर जेहेन-ए-गुस्सा तेवर नहीं होता,
हर आवाज-ए-धड़क दिल नहीं होता,
हर लाभों-ए-बूंद तिल नहीं होता;
हर गेहेर-ए-पानी सागर नहीं होता,
हर दर्द-ए-दोस्त सितमगर नहीं होता,
हर दूर-ए-फैला असमान नहीं होता,
हर प्यार-ए-शक्स रेहमान नहीं होता,
हर पलक-ए-धार सूरमां नहीं होता,
हर ख्वाब-ए-नींद अरमां नहीं होता;
हर आरजू-ए-हासिल जन्नत नहीं होता,
हर दुआ-ए-बक्श मन्नत नहीं होता
हर आवाज़-ए-फलक कौंद नहीं होता,
हर ईद-ए-चमन को चाँद नहीं होता;
हर दिल-ए-रेहेम फ़रिश्ता नहीं होता,
हर मुहोब्बत-ए-जेहेन का रिश्ता होता;
हर राह-ए-मुकाम मंजिल नहीं होता,
हर सफ़र-ए-साथी संगदिल नहीं होता;
हर खून-ए-दिल टुटा जिगर नहीं होता,
हर सुकून-ए-छाओं घर नहीं होता;
हर गुनगुन-ए-ग़ज़ल फनकार नहीं होता,
हर मतलब-ए-शायरी का जानकर नहीं होता;
हर इश्क-ए-बयां जोख़िम नहीं होता,
हर रूह-ए-बुखार को हक़ीम नहीं होता,
हर अदब-ए-एहसान अदा नहीं होता,
हर वायदा-ए-कुबूल खुदा नहीं होता;
हर मंज़र-ए-ख़ुशी मुक़द्दर नहीं होता,
हर तख़्त-ए-रियासत सिकंदर नहीं होता;
हर जुल्म-ए-उल्फत सजा हथियार नहीं होता,
हर जुबान-ए-मीठा दोस्त,यार नहीं होता.
हर कसम-ए-हाँ इकरार नहीं होता,
हर तारीफ-ए-लफ्ज़ प्यार नहीं होता.
चारुदत्त अघोर (ता.१६/२/११)
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