ॐ साईं
अधूरी जिंदगी.
कुछ आसुओं ने आँखों में बनाई है धुंदली नजर,
कहीं दिल-ए-आंगन में हरियाली है,कहीं बंजर;
उम्मीद है कुछ शबनमी बूंदों की,जो गिलाए असर,
एक अधूरी जिंदगी है,जो कर रहे है बसर...
यादें कोहरा,जो चुभोता है नुकीला नश्तर,
जैसे घुसाहो तनहा दिल में कोई टुटा खंजर;
न छोड़ी है तक़दीर ने,हुमे रुलाने कोई कसर,
एक अधूरी जिंदगी है,जो कर रहे है बसर...
डराके पल आता है,जो जिगर थामता है इस कदर,
बुन बुन ख्वाब,बुनते है रुसवाई की लम्बी चादर;
न खुशियों की झील है,न कोई सुकून-ए-गेहेरा सागर,
एक अधूरी जिंदगी है,जो कर रहे है बसर...
बेपनाह मुहोब्बत भी थी कभी अगर,
आज तनहा बनाया है,रूह-ए-मगर;
जैसे बिना मंजिल,मीलों वीरां सफ़र,
एक अधूरी जिंदगी है,जो कर रहे है बसर...
छिलते चलेंगे कब तलक पाँव,बिना कोई मंज़र,
दिल-ए-रेगिस्तान तपता है नोंच के अन्दर;
न पता था,ये सरल सांसे,भरेंगी इस कदर,
एक अधूरी जिंदगी है,जो कर रहे है बसर...
प्यासी रूह में,कोई न उतारे लज्जत-ए-ज़ेहेर,
जो खामोश करे इस बीते कल का केहेर;
कोई सुनी गली,हमे निकले गुजर;
एक अधूरी जिंदगी है,जो कर रहे है बसर...
न मस्तानी शाम है,न कोई उम्मीद का पेहेर,
जो जगाये पलकें नजराके कोई शेहेर;
एक तो चढ़ी सांस,जाये दिल से उतर,
एक अधूरी जिंदगी है,जो कर रहे है बसर...
धडके घडी सा दिल बगैर कोई गजर
नाक़ाम खोइसी आस,ढूंढे अपनी सुनी डगर;
ऐ खुदा रहमत हो बन्दे पर,जो अदबे सर अस्मां पर,
एक अधूरी जिंदगी है,जो कर रहे है बसर...
चारुदत्त अघोर(दी.७/२/११)
This is my life history .brilliant guess
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